Saturday, 16 July 2011


सॉनेट   

मेरी नन्हीं बिटिया
शुभ आशीर्वाद 
दादा दादी  करते हैं  
तुम्हें रोज  याद.

अगर  माँ पापा
डाँटें तुम्हें 
करना  हमसे फरियाद
मेरी  नन्हीं  बिटिया 
शुभ  आशीर्वाद.

बिटिया  रानी
धीरे धीरे
हो  रही  हो  सयानी
धोड़ी बहुत  शैतानी
तो  करोगी ही
लेकिन इतनी  मत  करना 
कि पीटने  की  नौबत  आ  जाए

अगर  माँ नाराज हो  जाए 
तो बाप  बचा ले 
अगर  बाप  नाराज  हो  जाए 
तो माँ आँचल में  छुपा  ले 
अगर  दोनों  साथ  साथ  डाँटें
हमसे  करना  फरियाद
बाबा दादी  का  शुभ आशीर्वाद.


चलो किसी  पुस्तकालय  में 
एक मोटा  सा  उपन्यास 
उठा लें  अनायास
और बीच  से  पढना  शुरू कर  दें.

और  अपनी  कल्पना  से  लगायें 
आगाज  और  अंजाम  का  कयास
जैसे  किसी  व्यक्ति का 
जाने  बिना इतिहास 
एकतरफा  बयान  पर  करके  विश्वास
लगाते  हैं. 

उपन्यास  का  प्रारंभ  और  अंत
कैसा  रहा होगा -  क्या  हुआ  होगा.
बिना  किसी  वर्जना - कल्पना  से  इसकी  सर्जना
अपने  आप  में  एक  अनूठा  अनुभव  होगा.

लेखक के  प्रारंभ  और  अन्त से  
कोसों  दूर होंगे  आप
लेकिन आपका  नजरिया
मुहैया कराएगा
पसंदीदा  चीजें पढने  का  जरिया