एक मोटा सा उपन्यास
उठा लें अनायास
और बीच से पढना शुरू कर दें.
और अपनी कल्पना से लगायें
आगाज और अंजाम का कयास
जैसे किसी व्यक्ति का
जाने बिना इतिहास
एकतरफा बयान पर करके विश्वास
लगाते हैं.
उपन्यास का प्रारंभ और अंत
कैसा रहा होगा - क्या हुआ होगा.
बिना किसी वर्जना - कल्पना से इसकी सर्जना
अपने आप में एक अनूठा अनुभव होगा.
लेखक के प्रारंभ और अन्त से
कोसों दूर होंगे आप
लेकिन आपका नजरिया
मुहैया कराएगा
पसंदीदा चीजें पढने का जरिया
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